कोरबा। कोरबा जिले में बीजेपी की अंदरूनी राजनीति में उथल-पुथल मची हुई है। पार्टी के निष्ठावान कार्यकर्ताओं को दरकिनार किया जा रहा है, जिससे संगठन कमजोर हो रहा है। चौंकाने वाली बात यह है कि पार्टी लाइन के खिलाफ काम करने वाले वे नेता और उनके करीबी हैं, जो वर्तमान में प्रदेश सरकार में प्रभावशाली पदों पर बैठे हैं। इस बात की जानकारी प्रदेश और राष्ट्रीय संगठन तक भी पहुंची, लेकिन अब तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई।
लोकसभा चुनाव में हार का बड़ा कारण!
पिछले लोकसभा चुनाव में बीजेपी को कोरबा सीट पर करारी हार का सामना करना पड़ा, जबकि प्रदेश की 10 अन्य सीटों पर बीजेपी ने शानदार जीत दर्ज की। पार्टी की हार के पीछे संगठन के कुछ सीनियर नेताओं की सोची-समझी रणनीति को जिम्मेदार माना जा रहा है।
अग्रवाल समाज को संगठन में किया जा रहा दरकिनार?
1. जिला अध्यक्ष पद पर अग्रवाल समाज को नहीं मिला मौका
बीजेपी जिला अध्यक्ष पद के चुनाव में अग्रवाल समाज के गोपाल मोदी का नाम प्रमुखता से सामने आया था, लेकिन आखिरी समय में विशेष गुट ने मनोज शर्मा का नाम आगे बढ़ा दिया और उन्हें अध्यक्ष बना दिया गया।
2. महापौर पद के लिए आरती अग्रवाल का टिकट कटा
महापौर उम्मीदवार के चयन में आरती अग्रवाल का नाम तय होने के बाद भी उन्हें टिकट नहीं दिया गया। संगठन के कुछ नेताओं ने साज़िश करके उनका नाम कटवा दिया।
3. सभापति चुनाव में पार्टी के अधिकृत उम्मीदवार को हरवाया
बीजेपी के अधिकृत उम्मीदवार हितानंद को पार्टी नेताओं ने ही हरा दिया। पार्टी के बागी पार्षद को चुनाव लड़ने की अनुमति दी गई और पार्टी की अनुशासनहीनता को पूरी तरह से नजरअंदाज किया गया।
पार्टी हाईकमान ने मांगा जवाब
कोरबा में बीजेपी नेताओं की गुटबाजी और संगठन को कमजोर करने की शिकायत प्रदेश से लेकर दिल्ली तक पहुंच गई है। प्रदेश बीजेपी ने तीन सदस्यीय कमेटी बनाकर जांच शुरू कर दी है।
मंत्री लखनलाल देवांगन पर भी उठे सवाल
निगम सभापति चुनाव में पार्टी के बागी प्रत्याशी को जीत की बधाई देने पर कोरबा शहर के विधायक एवं प्रदेश सरकार के मंत्री लखनलाल देवांगन से जवाब मांगा गया है।
अब देखना होगा कि बीजेपी हाईकमान इस मामले में क्या कार्रवाई करता है